आज वह फिर घर और बाहर के मोर्चे पर डटी है। कभी पति और ससुराल वालों की इच्छा का सम्मान करते हुए शादी के बाद शांभवी ने पत्रकारिता की जाॅब छोड़ दी थी, लेकिन अपने शौक के चलते शांभवी ने समाचार-पत्र पढ़ना और समाचारों पर अपनी पकड़ बनाये रखना जारी रखा।
शादी के बाद जब घर में सास-ससुर ने समझाया कि पति का अच्छा-खासा बिजनेस है क्या जरूरत है नौकरी की तो शांभवी ने भी घर की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। सब ठीक चल ही रहा था कि एकाएक कोरोना वायरस के संक्रमण ने पति का बिजनेस ठप कर दिया। लगातार लाॅकडाउन के बाद आर्थिक स्थिति गड़बड़ा गई, क्योंकि बिजनेस में लंबे समय से साथ दे रहे सहयोगियों की सहायता से इंकार भी नहीं किया जा सकता था।फैलते संक्रमण के साथ ये निर्णय भी लेना जरूरी था कि आगे क्या होगा? यदि इसी प्रकार की जीवन शैली को लंबे समय तक अपनाया गया तो बिजनेस में उठाव मुश्किल लग रहा था। अपने परिवार के साथ ही उन्हें घर और दुकान के कर्मचारियों के परिवार के लिए भी राशन-पानी का प्रबंध करना पड़ रहा था, जबकि आवक बिल्कुल थम गई थी। संक्रमण से ही नहीं, आने वाले आर्थिक संकट से भी निपटना जरूरी था।
लाॅकडाउन में घर में रहते हुए पति इसी गुत्थी को सुलझाने की कोशिश में जुटे हुए थे, कि पत्नी शांभवी ने राह सुझाई और अंधेरे में रोशनी की किरण बनकर सामने आई। शांभवी ने बताया कि वह लाॅकडाउन के नियमों का पालन करते हुए प्रेस में वापस नौकरी ज्वाइन कर सकती है। इतना सुनना था कि पसोपेश में पड़े घर के सदस्यों की आंखें खुशी से चमक उठीं। उसने बताया कि भले ही लाॅकडाउन में बाजार बंद हैं और घरों में सब कैद हैं, लेकिन मीडिया जगत अब भी कोरोना योद्धाओं की तरह मैदान में डटा हुआ है और लोगों में संक्रमण से जूझने और जीतने का जज्बा जगा रहा है।
शांभवी ने पति को विश्वास दिलाया कि उसे कुछ नहीं होगा, परंतु घर के सभी लोगों का यही कहना था कि जान है तो जहान है। ऐसे में घर पर रहना जरूरी है आर्थिक स्थिति तो आज नहीं तो कल संभल ही जाएगी। सभी की राय सुनने के बाद शांभवी ने कहा कि वे चिंता न करें उसे कुछ नहीं होगा वह अपनी इम्युनिटी बढ़ाये रखने के लिए सभी जरूरी उपाय करेगी।
वह मुंह पर मास्क लगाये, लाॅकडाउन के नियमों का पालन करते हुए पूरे उत्साह से एक बार फिर खबरों की दुनिया से जुड़ गई तथा अपनी लेखनी से समाज को जागरूक करने लगी। अपने ढाई साल के बेटे को घर पर दादा-दादी, पति के पास छोड़ शांभवी ने विपरीत परिस्थितियों में जिस प्रकार का हौसला और हुनर का कमाल दिखाया, उससे न केवल स्वयं शांभवी, बल्कि घर के सभी सदस्यों की आंखें खुशी से कुछ पल को भींग गईं।
पहले दिन जब काम करके शांभवी लौटी और स्वयं को सैनीटाइज करने लगी तो नम आंखों के साथ मुंह पर मुस्कान लिये सास बोल पड़ी: ‘‘देख ले बेटा, ऐसी होती हैं लड़कियां।’’ ससुर भी बड़े ही गर्व से कहने लगे: ‘‘लड़की का पढ़ा-लिखा होना कितना जरूरी है, ये सबको समझना होगा।’’ शांभवी ने अपनी कार्यशैली से सबको बता दिया कि डरने से नहीं बल्कि सतर्कता और हौसले से कोरोना हारेगा और हारेंगें बिगड़े हालात...! अपनी पत्नी की आत्मविश्वास और भावुकता से भरी बातों को सुनकर पति का भी दिल भर आया। उसे लगा कि अपने जीवनसाथी को वह बेवजह अपनी रूचि का काम करने से रोक रहा था, लेकिन पत्नी के सहयोगपूर्ण साहसिक कदम ने पति की आंखें खोल दीं। पति ने अपने आपको संभालते हुए पत्नि की ओर आशा भरी नजरों से देखा और कहा: परिवार की कोरोना वारियर्स को लाखों सलाम... और फिर सभी खिलखिलाकर हंस पड़े। शांभवी के इस महत्वपूर्ण कदम से सभी में विश्वास जागा कि वे न केवल कोरोना को मात देंगे, बल्कि आर्थिक संकट से भी उबर सकेंगे।
आशीष ''अनमोल''
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