बारिश में सेहत-पोषण-सौंदर्य-सजगता-सुरक्षा बेहद ज़रूरी है कुछ सावधानियां

 मॉनसून-आते ही बालों पर ख़ास ध्यान देना ज़रूरी होता है वरना रूसी होना, बालों में चिपचिपापन, नतीजतन बालों की टूटन सामान्य हो जाती है। इन समस्याओं से निजात पाने के उपाय हैं, जो आसान भी हैं और कारगर भी।

बालों को बारिश के पानी से बचाएं

बारिश में भीगने से बालों को बचाएं। यदि भीग गए हैं तो बालों को बंधा ना रखें। खोलकर रखें और ड्रायर से सुखाने के बजाय प्राकृतिक तरीक़े से सूखने दें। ड्रायर से सुखाने से बाल और उलझेंगे और टूटेंगे। अगर सुखाना मजबूरी बन जाए तो सारे बालों को आगे की ओर इकट्ठा करके ढीली पोनी बनाएं फिर सुखाएं। इससे बाल कम उलझेंगे। इस तरीक़े को हर बार बाल धोने के बाद ड्रायर से सुखाते समय अपना सकते हैं।


बालों की जड़ों से सिरों तक मालिश

बालों में तेल तो सभी लगाते हैं लेकिन झटपट तेल लगाकर निपटाना ही काफ़ी नहीं है। बालों को कंडीशन करने के लिए तेल की मालिश ज़रूरी है। इसके लिए उंगलियों के पोरों में तेल लगाकर बालों की जड़ों से लेकर सिरों तक हल्के हाथों से मालिश करें।  हथेली से मालिश करके बालों को ज़ोर-ज़ोर से रगड़ना नहीं है। इससे बाल कमज़ोर होकर टूटने लगते हैं।


बालों पर मेथीदाना मास्क लगाएं

वैसे तो घर पर कई तरह के घरेलू मास्क आज़मा सकती हैं लेकिन ये मास्क बालों को मज़बूती और चमक दोनों ही देता है और फटाफट तैयार भी हो जाता है। इसे बनाने के लिए दो चम्मच मेथीदाने को रातभर पानी में भिगो लें और सुबह पीसकर पेस्ट बना लें। पेस्ट को बालों की जड़ों से लेकर सिरों तक में लगाएं और आधे घंटे बाद धो लें।


बालों को टूटने से बचाएं

इस समय बाल चिपचिपे रहते हैं और अगर कसकर चोटी की है या कसा हुआ जूड़ा बांधती हैं तो ये टूट सकते हैं। इसलिए इस मौसम में बालों को ढीला बांधे। इसके अलावा गीले बालों में भूलकर भी कंघी न करें, क्योंकि इस समय बाल सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक झड़ते हैं।


बालों की करें ट्रिमिंग

बाल झड़ने की समस्या से बचने के लिए इस समय ट्रिमिंग कराती रहें। आप ख़ुद भी बालों को नीचे से हल्का-हल्का छांट सकती हैं। इससे बाल कम झड़ेंगे और घने भी बनेंगे।


बालों काे झड़ने से रोकें

बालों में रूसी हुई है, तो अधिक झड़ेंगे। इसके लिए दही में नींबू की कुछ बूंदें डालकर मिलाएं और बालों की जड़ों में लगाएं और फिर शैम्पू कर लें।


स्वस्थ बाल और त्वचा भी सेहत के हाल बयां करते हैं। विटामिन संपूर्ण शरीर को पोषण देते हैं, लेकिन बालों और त्वचा के लिए जो ख़ास विटामिन है वो है बायोटिन।


क्या है ये, इसके बारे में विस्तार से जानिए।


बायोटिन नाम का विटामिन बालों को स्वस्थ और त्वचा को चमकदार बनाता है। जब त्वचा या बालों की समस्या होती है, तो ज़्यादातर चिकित्सक बायोटिन की गोली लेने की सलाह देते हैं। हालांकि कई महिलाएं बालों और त्वचा की समस्या ना होते हुए भी इन्हें स्वस्थ रखने के लिए इसके सप्लीमेंट्स लेती हैं। पर इसके इस्तेमाल से पहले यह जानना भी ज़रूरी है कि असल में बायोटिन है क्या और इसकी कमी कैसे दूर की जा सकती है।


दरअसल, बायोटिन विटामिन बी कॉम्प्लेक्स का हिस्सा है। यह भोजन में पाए जाने वाले कुछ पोषक तत्वों को ऊर्जा में बदलने में मदद करता है। साथ ही बालों, त्वचा और नाखूनों को स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कार्बोहाइड्रेट और फैट मेटाबोलिज़्म में भी इसका अहम योगदान है।


जानें, कमी है या नहीं

बायोटिन विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों में मौजूद होता है, इसलिए शरीर में इसकी कमी बहुत कम होती है। अधिकतर, बायोटिन की आवश्यकता को स्वस्थ आहार से अनुकूलित किया जाता है। हालांकि कमी के लक्षण धीरे-धीरे शुरू होते हैं और समय के साथ बढ़ सकते हैं।


जब शरीर में इसकी कमी होती है, तो बाल पतले हो जाते हैं और झड़ने लगते हैं। आंख, नाक, मुंह और गुदा सहित शरीर के छिद्रों के आसपास पपड़ीदार और लाल चकत्ते हो सकते हैं। थकावट, टूटे हुए नाख़ून, जोड़ों में दर्द आदि भी इसकी कमी के कारण हो सकते हैं।


ये हैं बायोटिन के प्राकृतिक स्रोत

बायोटिन को मानव शरीर संश्लेषित (सिंथेसाइज) नहीं कर सकता और इसलिए इसे आहार स्रोतों के माध्यम से लेना आवश्यक है। जिन खाद्य पदार्थों में बायोटिन उच्च मात्रा में पाया जाता है वो हैं दाल और फलियां, मछली, अंडे की ज़र्दी, पनीर, सोयाबीन, मूंगफली, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, फूलगोभी, मशरूम, नट और बीज जैसे सूरजमुखी के बीज। किशोरों और वयस्कों को प्रतिदिन 30 से 100 माइक्रोग्राम बायोटिन लेना चाहिए। वहीं सम्लीमेंट्स की बात करें, तो आहार से जो बायोटिन मिलता है, वह शरीर के लिए पर्याप्त होता है।


इसके अलावा आंत के बैक्टीरिया कुछ बायोटिन का उत्पादन करते हैं, इसलिए आंत को स्वस्थ रखना भी ज़रूरी है। चूंकि यह पानी में घुलनशील विटामिन है, इसलिए शरीर में बायोटिन की अधिकता नहीं हो सकती। पर इसका यह मतलब भी नहीं है कि बायोटिन के सप्लीमेंट्स का सेवन करना सुरक्षित है। विशेषज्ञ मानते हैं कि सप्लीमेंट का सेवन चिकित्सकीय देखरेख में ही होना चाहिए क्योंकि इसके अधिक सेवन से कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।


इन्हें करें आहार में शामिल

पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन का सेवन (0.8 से 1 ग्राम प्रोटीन प्रतिदिन शरीर के प्रति किलोग्राम वज़न के मुताबिक़) के साथ बायोटिन की कमी पूरी की जा सकती है, जो बालों से संबंधित समस्या के लिए फायदेमंद भी हो सकता है।


कम वसा वाले दूध और दूध उत्पाद जैसे दही व पनीर और फलियां, दालें, सोयाबीन, अंडा, मछली, मांस जैसे प्रोटीन समृद्ध खाद्य पदार्थों के साथ बायोटिन वाले खाद्य पदार्थों को नियमित रूप से आहार में शामिल करें।


अगर छाता लेने जा रहे हैं तो इसे ख़रीदते समय कुछ बातों पर ज़रूर ध्यान दें।


तानें (रिब्स) हों टिकाऊ

कई बार हम देखते हैं तेज़ बारिश या हवा चलने पर छाता उल्टा हो जाता है। कारण है कमज़ोर रिब्स। छाता लेते समय देख लें कि तानें पतली या कमज़ोर न हों।


एक पंथ दो काज

छाता सिर्फ़ बारिश से ही नहीं बल्कि धूप से भी बचाए यानी गर्मियों में भी उसका इस्तेमाल कर सकें इस हिसाब से रंग और गुणवत्ता का लें।


कपड़े की मज़बूती

कपड़ा मज़बूत होना चाहिए। कई छाते अधिक बारिश के कारण टपकने लगते हैं और जल्दी ही फट जाते हैं।


फोल्डिंग छाता

फोल्डिंग छाते बैग में रखने के हिसाब से बनाए जाते हैं। इनमंे थ्री फोल्ड छाता काफ़ी छोटा हो जाता है। लेकिन इन्हें लेते समय दो-तीन बार बंद करके और खोलकर देखें।


हैंडल आरामदायक हो

छाता लेते समय हैंडल को पकड़कर देखें। अगर चुभ रहा हो या हथेली में दर्द हो रहा हो तो न ख़रीदें। शाफ्ट (जिस पर रिब्स लगी होती हैं) भी मज़बूत होना चाहिए।


हैंड फ्री छाते

बच्चों के लिए हैंड फ्री छाते ख़ासतौर पर बनाए गए हैं। ये सिर पर लग जाते हैं और इन्हें पकड़ना भी नहीं पड़ता।


घर को सैनिटाइज़ करना ज़रूरी है


इस समय घर में इस्तेमाल में आने वाली चीज़ों को कीटाणुरहित करना रोज़मर्रा की सफ़ाई का हिस्सा होना चाहिए। कैसे घर को सैनिटाइज़ करें, जानते हैं।


गर्म पानी का इस्तेमाल करें


पोछा लगाने के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल करें। इसके साथ ही फिनायल डालकर ही पोछा लगाएं।


साबुन वाले पानी का भी इस्तेमाल

अधिक मात्रा में सैनिटाइज़र का प्रयोग करना संभव नहीं है तो खिड़कियों और दरवाज़ों को साबुन युक्त पानी से धो दें। कोरोना संक्रमित हुए सदस्य के कमरे की खिड़कियों का ख़ास ध्यान रखते हुए सैनेटाइज़ करें।


इन्हें 15 दिनों में एक बार धो लें


बेडशीट, पर्दे, पिलो कवर, कुशन कवर आदि को 15 दिनों में बदलकर धो लें। इन्हें धोते समय डिटॉल या कीटाणुरहित सॉल्यूशन का इस्तेमाल करें। ऐसा एक बार नहीं बल्कि हर बार जब भी नहाएं या कपड़े धोएं तो पानी में डिटॉल डालें। कपड़े, तौलिये और अन्य कपड़ों को गर्म पानी में धोना बेहतर होगा।


बीमार व्यक्ति के कपड़े अलग धाेएं

कपड़े धोने के बाद अच्छी तरह से सुखाए जाना चाहिए। बीमार व्यक्तियों के कपड़े और अन्य चीज़ों को बाकी सदस्यों के कपड़ों के साथ न धोएं।


पेपर नैपकिन का इस्तेमाल

स्पॉन्ज के बजाय डिस्पोज़ेबल पेपर नैपकिन से चीज़ों को साफ़ करें। स्पॉन्ज या तौलिये का उपयोग करने से कीटाणुओं के अन्य स्थानों पर फैलने की आशंका बढ़ जाती है।


गैजेट्स पर सीधे स्प्रे न करें


लैपटॉप, मोबाइल जैसे गैजेट्स पर सीधे स्प्रे न करें बल्कि टिश्यू पेपर पर स्प्रे करके फिर साफ़ करें, ताकि गैजेट्स के अंदर पानी या एल्कोहल न जाए।


इन वस्तुओं की सफ़ाई ज़रूरी

दरवाज़े की कुंडी, स्विच, नल, हैंडल, रेलिंग, बाथरूम, सिंक, डेस्क, टेबल, रिमोट की सफ़ाई करना महत्वपूर्ण होता है। इन सभी पर सैनिटाइज़र स्प्रे करें। लकड़ी की कुर्सियों पर अगर बाहर से आने वाले बैठे हों, तो उन्हें कुछ देर धूप में रख दें। कालीन या रनर का इस्तेमाल इन दिनों ना करें तो बेहतर। इनकी सफ़ाई और सुखाना दोनों मुश्किल होते हैं।


जूते-चप्पल बाहर ही छोड़कर आएं


अगर सैनिटाइज़र पूरे घर में डाल सकें तो बेहतर है। यदि बाहर जाना पड़ता है तो सुबह का समय चुनें। बाहर से आने वाले व्यक्ति को जूते-चप्पल बाहर ही छोड़कर आने को कहें और तलवों पर सैनेटाइज़र स्प्रे करके घर की चप्पल पहनें व तुरंत नहाकर कपड़े बदल लें। बाहर के कपड़ों को कीटाणुनाशक क्लीनर के पानी में भिगोकर धो लें।


इन्हें रोज़ाना साफ़ करें


अगर बाथरूम का उपयोग घर के हर सदस्य द्वारा किया जा रहा है तो बीमार व्यक्ति के बाथरूम और टॉयलेट उपयोग करने के बाद हर बार इन्हें डिसइनफेक्ट करना चाहिए। आजकल टॉयलेट सीट स्प्रे भी आते हैं जो आसानी से उपलब्ध होते हैं। इन्हें हर बार टायलेट सीट इस्तेमाल के बाद स्प्रे करें। बाथरूम के नल और डोर नॉब्स सर्दी और फ्लू के वायरस से संक्रमित हो जाते हैं।


ध्यान रखेंं...

सफ़ाई करते समय ग्लव्स ज़रूर पहनें, इससे एलर्जी और संक्रमण का ख़तरा नहीं रहेगा। इस्तेमाल के बाद ग्लव्स फेंक दें और हाथों को धोना न भूलें।

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