विकास ने कभी नहीं सोचा था कि आज साक्षात्कार में उसके साथ ऐसा कुछ घटित हो जाएगा जिसे वह जीवन भर नहीं भूल सकेगा। दरअसल एक समय वह भी था जब विकास डिग्री लेकर नौकरी के लिए भटक रहा था, परंतु कहीं भी जॉब नहीं मिल पा रहा था। वह कई बार हताश हो जाता, झुंझला जाता कि इंटरव्यू में उससे ऑफिस में किये जाने वाले काम को लेकर कम और जनरल नॉलेज के नाम पर आलतू-फालतू की बातें ज्यादा पूछी जातीं। घर आने पर मॉ पूछती तो यही कह देता कि मॉ ईमानदारी से होगा तो जरूर मेरा चयन हो जाएगा।
बायोडाटा देखते हुए विकास
ने प्रफुल्ल को
बैठने का इशारा
किया और अपने
बारे में बताने
को कहा। प्रफुल्ल की
बात पूरी होती
इससे पहले ही
विकास ने पूछ
लिया बाकी सब
तो ठीक है
ये बताइए आपकी
कितनी गर्लफ्रेण्ड हैं?
इतना सुनते ही
प्रफुल्ल भी दंग रह
गया! वह अपनी
सीट से उठ
खड़ा हुआ। कभी
पद और कुर्सी
के मद में
प्रफुल्ल भी नौकरी करने
के उत्सुक युवकों,
कुछ सीखने और
जीवन में बेहतर
कर गुजरने की
ललक लिये कंपनी
में आने वाले
बेरोजगार नौजवानों से इसी प्रकार
की ठिठौली किया
करता था, उन्हीं
में से एक
विकास भी था,
जिसने कंपनी में
काम करने की
इच्छा जताई तो
भगा दिया गया
था।
वर्षों बाद कोरोना
संकटकाल में समय ही
नहीं बदला, परिस्थितियां भी
बदल गईं। एक
अनुभवी व्यक्ति इंटरव्यू रूम
से सिर झुकाए
बाहर निकल रहा
है।
रूकिए!!! बाहर जाते
प्रफुल्ल कुमार को विकास
ने कहा, और
पैर वहीं थम
गए। फाइल बगल
में दबाकर हाथ
जोड़ते हुए प्रफुल्ल भावुक
होकर कहने लगा
: सॉरी! मैं समझ
गया बेरोजगारी का
दर्द क्या होता
है।
विकासः ठीक है, कल आकर अपना ऑफर लेटर ले जाना।
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