आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा भी कहते हैं। इस साल आषाढ़ पूर्णिमा या गुरु पूर्णिमा 24 जुलाई, दिन शनिवार को है। आषाढ़ पूर्णिमा के दिन ही महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था। उन्होंने मानव जाति को चारों वेदों का ज्ञान दिया था और सभी पुराणों की रचना की थी। महर्षि वेदव्यास के योगदान को देखते हुए आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरु की पूजा की जाती है। आषाढ़ पूर्णिमा का व्रत रखने के साथ ही भक्त भगवान विष्णु की अराधना करते हैं और सत्यनारायण कथा का पाठ या श्रवण करते हैं।
गुरु गोविन्द दोनों खड़े, काके लागूं पाँय।
बलिहारी गुरु आपनो, गोविंद दियो बताय॥
गुरु पूर्णिमा शुभ मुहूर्त-
गुरु पूर्णिमा तिथि प्रारंभ - 10:42 बजे (23 जुलाई 2021) से गुरु पूर्णिमा तिथि समाप्त - 08:05 बजे (24 जुलाई 2021) तक
पूर्णिमा तिथि 23 जुलाई 2021, शुक्रवार की सुबह 10 बजकर 43 मिनट से शुरू होकर 24 जुलाई 2021, शनिवार की सुबह 08 बजकर 06 मिनट तक रहेगी।
इस बार सावन में बन रहा है ऐसा विशेष संयोग, श्रावण सोमवार में ऐसी पूजा से मिलेगा लाभ
गुरु पूर्णिमा पर बन रहे ये शुभ योग-
इस साल गुरु पूर्णिमा पर विष्कुंभ योग सुबह 06 बजकर 12 मिनट तक, प्रीति योग 25 जुलाई की सुबह 03 बजकर 16 मिनट तक और इसके बाद आयुष्मान योग लगेगा। ज्योतिष शास्त्र में प्रीति और आयुष्मान योग का एक साथ बनना शुभ माना जाता है। प्रीति और आयुष्मान योग में किए गए कार्यों में सफलता हासिल होती है। विष्कुंभ योग को वैदिक ज्योतिष में शुभ योगों में नहीं गिना जाता है।
पंचांग-पुराण से और
सूर्य देव 25 दिनों तक कर्क राशि में रहकर इन राशियों को पहुंचाएंगे फायदा, देखें क्या आपकी राशि भी है इस लिस्ट में शामिल
सूर्य 25 दिनों तक कर्क राशि में रहकर इन राशियों को पहुंचाएंगे फायदा
25 जुलाई से शुरू हो रहा है सावन का महीना, मकर, कुंभ, धनु, मिथुन, तुला राशि वाले जरूर करें ये छोटा सा काम
सावन के महीने में मकर, कुंभ, धनु, मिथुन और तुला राशि वाले करें ये उपाय
आने वाले 21 दिनों तक इन राशियों पर बरसेगी शुक्र देव की कृपा, वैवाहिक जीवन रहेगा सुखमय
आने वाले 21 दिनों तक इन राशियों पर बरसेगी शुक्र देव की कृपा
मंगल और शुक्र का इस राशि में बना संयोग, 6 अगस्त तक कैसा रहेगा आपका समय
मंगल और शुक्र का इस राशि में बना संयोग, 6 अगस्त तक कैसा रहेगा आपका समय
ऐसे करें पूजा-
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, गुरु पूर्णिमा पर पान के पत्ते,पानी वाले नारियल, मोदक,कर्पूर,लौंग,इलायची के साथ पूजन से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। सौ वाजस्नीय यज्ञ के समान फल मिलता है।
गंगा स्नान से दमा, त्वचा रोग में लाभ- आचार्य राजनाथ झा ने बताया कि पूर्णिमा पर गंगा स्नान स्वास्थ्य और आयुवर्द्धक है। त्वचा रोग और दमा में काफी लाभ मिलता है।
विदुर नीति: व्यक्ति को बर्बादी के रास्ते पर लेकर जाती हैं उसकी ये आदतें
वैदिक मंत्र जाप से खास कृपा- वैदिक मंत्र जाप और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से गुरु की खास कृपा मिलेगी।
खीर दान से मानसिक शांति- गुरु पूर्णिमा की रात खीर बनाकर दान करने से मानसिक शांति मिलती है। चंद्र ग्रह का प्रभाव भी दूर होता है।
बरगद की पूजा- याज्ञवल्य ऋषि के वरदान से वृक्षराज(बरगद) को जीवनदान मिला था। इसलिए गुरु पूर्णिमा पर बरगद की भी पूजा की जाती है।
गुरु पूर्णिमा की पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर घर की सफाई करें उसके बाद नहाकर साफ कपड़े पहनें। पूजा स्थान पर पटिए पर सफेद कपड़ा बिछाकर उस पर चंदन से 12 सीधी और 12 आड़ी रेखाएं खींचकर व्यास-पीठ बना लें। इसके बाद गुरु पूजा के लिए संकल्प लेना चाहिए और दसों दिशाओं में चावल छोड़ना चाहिए। फिर व्यासजी, ब्रह्माजी, शुकदेवजी, गोविंद स्वामीजी और शंकराचार्यजी के नाम लेकर उन्हें प्रणाम करें और पूजन सामग्री से पूजा करें। इसके बाद अब अपने गुरु या उनके चित्र की पूजा करके श्रद्धा अनुसार दक्षिणा देना चाहिए। आखिरी में गुरु पूजा के बाद आरती करें और प्रसाद बांट दें।
व्रत और विधान
गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी नहाकर पूजा करके साफ कपड़े पहनकर गुरु के पास जाना चाहिए। गुरु को ऊंचे आसन पर बैठाकर फूलों की माला पहनानी चाहिए। इसके बाद कपड़े, फल और फूल चढ़ाकर श्रद्धा अनुसार दक्षिणा देनी चाहिए। इस प्रकार श्रद्धापूर्वक पूजा करने से गुरु का आशीर्वाद मिलता है। गुरु पूर्णिमा पर वेद व्यासजी द्वारा लिखे ग्रंथों को पढ़ना चाहिए और उनके उपदेशों पर चलने का संकल्प लेना चाहिए।
नारद पुराण के अनुसार आत्मज्ञान और कर्तव्य बताने वाले गुरु के प्रति आस्था प्रकट करने का पर्व है गुरु पूर्णिमा
हिन्दू पंचांग के अनुसार आषाढ़ पूर्णिमा के दिन गुरु पूजा करने की परंपरा है। नारदपुराण के अनुसार ये पर्व आत्मस्वरूप का ज्ञान देने और कर्तव्य बताने वाले गुरु के प्रति अपनी आस्था प्रकट करने के लिए मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 24 जुलाई शनिवार को है। गुरु पूर्णिमा पर केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि माता-पिता, बड़े भाई-बहन या किसी सम्माननीय व्यक्ति को गुरु मानकर उनकी भी पूजा की जा सकती है।
इस पर्व को अंधविश्वासों के आधार पर नहीं बल्कि श्रद्धा के साथ मनाना चाहिए। वर्तमान स्थितियों को देखते हुए इस पर्व पर भीड़ में जाने से बचना चाहिए। इसके लिए आपको घर पर ही गुरु पूजा करनी चाहिए।
यदि आप अच्छा परिणाम पाना चाहते हैं, तो अपने पंडित जी की सलाह लेना ना भूलें।
प्रिय पाठ्कों से अनुरोध है, अपनी प्रतिक्रिया-Comment कर सकते है, आपकी प्रतिक्रिया का हमें इंतजार रहेगा, ये आपका अपना मंच है, लेख पसंद आने पर Share और Like जरुर करें

0 Comments