पेट के विस्तार से परेशान हैं वज़न बढ़ने की समस्या सामने आ रही है। और गृहणियां भी। खाने में ऐसा क्या कम करें, समझ नहीं आता। बच्चों का भी वज़न बढ़ रहा है। तो व्यायाम करें और पौष्टिक आहार लें

तनाव- तनाव आवश्यकता से अधिक बढ़ जाए तो इससे कोर्टिसोल का स्तर भी बढ़ जाता है. एक स्टडी के मुताबिक, कोर्टिसोल का उच्च स्तर व फैट मास का आपस में गहरा नाता है. कोर्टिसोल नामक स्ट्रेस हार्मोन कई तरह की समस्याएं पैदा करने के साथ−साथ वजन भी बढ़ाने का काम करता है

वज़न बढ़ने की समस्या सामने आ रही है। इसने बचने की अहम वजहों में से एक तो मोटापे से जुड़े रोग हैं, जैसे उच्च रक्तचाप और मधुमेह, वहीं यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमज़ोर करने का कारण भी बनता है। यह भी देखा गया है कि स्थूलकाय लोगों को कोरोना संक्रमण से ठीक होने में अधिक समय व परेशानी का सामना करना पड़ा है। सो, बढ़ते वज़न को कम करना कॉस्मैटिक से ज़्यादा मेडिकली ज़्यादा ज़रूरी है। वज़न को नियंत्रित रखने या कम करने में दो मुख्य तरीके कारगर हैं- व्यायाम और आहार।


चूंकि, तेज़ चहलकदमी अच्छा व्यायाम होते हुए भी बाहर निकलने की आवश्यक बंदिशों के चलते इस दौर में नहीं किया जा सकता, सो घर पर ही व्यायाम करना एकमात्र लेकिन ज़रूरी रास्ता है। व्यायाम को लेकर नियमित व सर्तक रहें। ऐसे कई वीडियो आपको ऑनलाइन मिल जाएंगे, जो एक ही जगह पर खड़े रहते हुए भी 40-45 मिनट तक के ऐसे व्यायाम करने में मदद कर देंगे, जिनमें चलना, हाथ-पैरों के पीटी जैसे स्टेप्स, स्ट्रेचिंग करना शामिल होंगे। इनसेे खड़े रहकर हार्ट रेट भी बढ़ा सकते हैं। अपने लिए उचित व्यायाम रूटीन चुनें और उसका पालन करें।


वज़न ना बढ़े इसके लिए भोजन पर नियंत्रण रखें। उन वस्तुओं को कम ना करें, जिनसे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। केवल उन्हीं को त्यागें या कम करें जिनसे वज़न बढ़ता है। पहले भोजन के मुख्य अवयव समझ लें।

कार्बोज़ (कार्बोडाइड्रेट्स) - ये ऊर्जा देने वाले सबसे सरल भोज्य तत्व हैं, जो हमें शक्कर, रोटी, चावल, जूस, फल आदि से मिलते हैं। कार्बोहाइड्रेट की ख़ासियत यह होती है कि यह दो घंटे में ही पच जाता है और ऊर्जा दे जाता है। अगर इससे मिलने वाली ऊर्जा का इस्तेमाल आप नहीं कर पाएं यानी आपकी क्रियाशीलता कम है, तो यह ऊर्जा फैट में तब्दील होकर शरीर में जमा हो जाएगी और वज़न बढ़ाएगी।


प्रोटीन और फैट - इनका उपयोग धीमी गति से होता है। प्रोटीन ज़रूरी तत्व है क्योंकि शरीर की भीतरी मरम्मत करने में तथा बच्चों के विकास में यह महती भूमिका निभाता है। प्रोटीन का स्रोत हैं- दालें, दूध, पनीर, गिरियां, अंडा और मांस-मछली आदि। इनसे अन्य ज़रूरी सूक्ष्म पोषक तत्व भी मिलेंगे, जो शरीर के लिए ज़रूरी हैं, जैसे ज़िंक, कैल्शियम, आयरन आदि।


विटामिन और खनिज - मौसम के फलों और सब्ज़ियों से हमें विटामिन और खनिज मिलेंगे, जो रोगों से बचने के लिए ज़रूरी हैं।

तो बचना किससे हैं, ध्यान किसकी मात्रा का रखना है?


कार्बोज़ का। इसके लिए रोटी, चावल, नूडल्स, ब्रेड, इडली आदि का उपयोग सीमित मात्रा में करें। दो घंटे से कम व्यायाम करने वाले और बैठकर काम करने वाले कार्बोज़ पर विशेष ध्यान दें। इसके लिए आहार निर्देश ये हैं कि महिलाएं दिन-भर में पांच रोटियों के बराबर का अनाज ले सकती हैं। इसमें रोटी, पोहा, उपमा, चावल आदि शामिल हैं। अगर सुबह एक कटोरी पोहा लिया है, तो लंच में दो रोटियां लें और शाम को थोड़ा उपमा लिया है, तो डिनर में एक रोटी ही खाएं। इसी तरह का कार्बोज़ प्रबंधन पुरुष भी करें। उन्हें दिन में आठ रोटियों के बराबर का अनाज खाना चाहिए।


आजकल बच्चे घर में ही हैं और व्यायाम या शारीरिक गतिविधि वाला कोई खेल भी नहीं खेल पा रहे हैं। उनका वज़न नियंत्रित रखने के लिए कार्बोज़ को उसी तरह प्रबंधित करें जैसे स्त्री-पुरुषों के लिए बताया गया है। डिब्बाबंद भोजन उन्हें ना खाने दें। घर का बना भोजन ही दें। बिस्किट्स, पिज़्ज़ा, बर्गर आदि सप्ताह में एकबार से ज़्यादा ना दें। दिन में एक चीज़ क्यूब एक बच्चे के लिए पर्याप्त होगा।


इनका रखें ध्यान...

कभी भी खाना खाने के तुरंत बाद ना लेटें।

काम करने के हर घंटे के बाद, उठकर पांच मिनट चहलकदमी करें।

कभी भी व्यायाम की अवहेलना ना करें।

हर घंटे पानी पीएं।


इन आदतों के कारण बढ़ता है आपका वजन, जानकर दंग रह जाएंगे आप


कई लोगों के लिए वजन घटाना अपने आप में एक मुश्किल काम है. वजन बढ़ने के पीछे आमतौर पर कई कारण होते हैं.


गलत लाइफस्टाइल के चलते आजकल वजन बढ़ना काफी आम हो गया है. अक्सर लोग वजन घटाने के लिए कई तरीके अपनाते हैं लेकिन फिर भी कोई फायदा नहीं मिल पाता. हालांकि एक्सरसाइज और उचित डाइट से वजन को नियंत्रित किया जा सकता है. लेकिन कई लोगों के लिए वजन घटाना अपने आप में एक मुश्किल काम है. वजन बढ़ने के पीछे आमतौर पर कई कारण होते हैं. इन कारणों का पता करके ही आप इसे कम कर सकते हैं. आइए जानते हैं किन कारणों के कारण आपका वजन बढ़ता है. 


कम सोना- कम नींद लेना भी वजन बढ़ने का मुख्य कारण है. कम सोने से भूख को दबाने वाला हार्मोन लेप्टिन बढ़ जाता है. जिससे व्यक्ति को बार−बार भूख लगती है. खासतौर से, रात के समय जब व्यक्ति जाग रहा होता है तो उसे भूख अधिक लगती है जिससे वह कुछ भी उल्टा सीधा खा लेते हैं. इस समस्या से निपटने के लिए एक बेहतरीन स्लीप हाईजीन को फॉलो करना बेहद आवश्यक है. इसके लिए सोने से दो घंटे पहले भोजन कर लें. 


नाश्ता ना करना- ऑफिस की भागदौड़ में कई लोग सुबह नाश्ता नहीं करते हैं. ब्रेकफास्ट न करने से मेटाबोलिज्म प्रभावित होता है 

पानी ना पिना- पानी शरीर में संतुलन बनाए रखने में मदद करता है जिससे अधिक भूख नहीं लगती है. साथ ही पर्याप्त पानी पीने से कैलोरी बर्न होती है और पाचन बढ़ता है. सुबह उठकर पानी न पीने से वजन बढ़ सकता है.


एक्सरसाइज ना करना- एक्सरसाइज करने से आपना वजन काफी हचद तक कम हो सकता है. रोजाना सुबह कुछ मिनट स्ट्रेचिंग करने से वजन कम होने में मदद मिलती है. अगर आप रुटीन तौर पर एक्सरसाइज नहीं करते तो इससे आपका धीरे धीरे वजन बढ़ने लगता है. 


व्यायाम करना सेहत के लिए फ़ायदेमंद है, लेकिन कई मिथक इस राह में रुकावट बन जाते हैं, व्यायाम करने के समय से लेकर अवधि तक लोगों के मन में अस्पष्टता रहती है, लिहाज़ा से फिट रहने की इच्छा रखते हुए भी व्यायाम से बचते हैं।


हर कोई ख़ुद को फिट रखना चाहता है। बावजूद इसके लोग कसरत से बचते रहते हैं क्योंकि फिटनेस से जुड़े मिथक उनकी राह रोक लेते हैं। आइए जानतें हैं ऐसे ही कुछ मिथक और उनकी सच्चाई।


मिथ्या... व्यायाम के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा होता है।

मान्यता... सुबह का समय अच्छा होता है लेकिन केवल यही समय सही है, ऐसा नहीं है। फिटनेस एक्सपर्ट मानते हैं कि समय से ज़्यादा ज़रूरी है व्यायाम में नियमितता। सुबह व्यायाम के फ़ायदे ये हैं कि एक तो रात की नींद के बाद आप ताज़ादम होते हैं और दूसरे, सुबह कसरत करने के बाद आप पूरे दिन ऊर्जावान महसूस करते हैं।


मिथ्या... व्यायाम से पहले स्ट्रेचिंग अनिवार्य है।

मान्यता... नहीं, भूलकर भी ऐसा ना करें। व्यायाम से पहले स्ट्रेचिंग करने से मांसपेशियां कमज़ोर हो जाती हैं। चोट लगने का ख़तरा भी बढ़ जाएगा। इसलिए कसरत की शुरूआत वॉर्मअप से करें। इसके बाद हल्का वज़न उठाना शुरू करें और उसके बाद स्ट्रेचिंग की बारी आती है।


मिथ्या... कसरत में दर्द महसूस होना चाहिए।

मान्यता... यह बिल्कुल ग़लत है। कसरत के दौरान शुरूआत में हल्का-फुल्का दर्द होना सामान्य बात है लेकिन अगर आपको अधिक दर्द महसूस होता है तो फिर आपको चिकित्सकीय परामर्श की आवश्यकता है। क्षमता के अनुसार ही व्यायाम करें।


मिथ्या... व्यायाम के दौरान पसीना आने से वज़न जल्दी कम होता है।

मान्यता... सच नहीं है। मसलन, आप गर्मी में बाहर जाते हैं तो पसीना आता है लेकिन क्या वज़न कम होता है? नहीं ना, इसी तरह वर्कआउट करते हुए पसीना आता है लेकिन जब तक नियमित व्यायाम नहीं करेंगे वज़न कम नहीं होगा, फिर चाहे कितना भी पसीना बहा लें।


मिथ्या... बेहतर परिणाम के लिए प्रोटीन है ज़रूरी।

मान्यता... इसमें थोड़ा-सा बदलाव किया जा सकता है। प्रोटीन मांसपेशियों की रिकवरी को बढ़ा देता है और कसरत करने के बाद आधा या एक घंटे बाद लिया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ज़्यादा प्रोटीन का सेवन नहीं करना चाहिए।


मिथ्या... मासिक धर्म के दौरान कसरत से बचें।

मान्यता... मासिक धर्म के दौरान व्यायाम से बचने की जरूरत नहीं है। हां, भारी व्यायाम नहीं करने चाहिए। वज़न उठाने से तो पूरी तरह बचें। इस दौरान किया वर्कआउट रक्तप्रवाह को बेहतर बनाने के साथ ही मासिक धर्म को भी नियमित करता है। हल्की-फुल्की एक्सरसाइज़ करें।


मिथ्या... वेट ट्रेनिंग करने के बाद महिला पुरुष की तरह नज़र आती है।

मान्यता... यह सबसे आम और बेहद ग़लत धारणा है। वज़न का प्रशिक्षण किसी के लिए भी हो सकता है। वेट ट्रेनिंग आपकी मांसपेशियों को और मज़बूत करती है व उनकी क्षमता भी बढ़ाती है। इसका आदमी या औरत से कोई लेना-देना नहीं है

यदि आप अच्छा परिणाम पाना चाहते हैं, तो इसके इस्तेमाल से पहले चिकित्सक की सलाह लेना ना भूलें।

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