आप गिलोय के इस्तेमाल से प्यास, जलन, डायबिटीज, कुष्ठ और पीलिया रोग में लाभ ले सकते हैं। इसके साथ ही यह वीर्य और बुद्धि बढ़ाती है और बुखार, उलटी, सूखी खाँसी, हिचकी, बवासीर, टीबी, मूत्र रोग में भी प्रयोग की जाती है। महिलाओं की शारीरिक कमजोरी की स्थिति में यह बहुत अधिक लाभ पहुंचाती है।
मुलेठी यानी एक झाड़ीदार पेड़ होता है, जो अंदर से पीला, रेशेदार और हल्की सुगंध वाला होता है। इसे एक ऐसे औषधीय घरेलू नुस्खे के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, जो कई बीमारियों में फायदा पहुंचाती है। मुलेठी का इस्तेमाल सदियों से आंखों के रोग, मुख रोग, कंठ रोग, उदर रोग, सांस विकार, हृदय रोग, घाव के उपचार के लिए किया जाता आ रहा है।
इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं ताकि वायरस से लड़ने में शरीर सक्षम बन सके। यह शरीर से विषैले तत्व को बाहर निकालते हैं और ब्लड भी प्यूरीफाय करते हैं। इसे घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है।
फायदे: गिलोय या गुडूची का पौधा रोगों से लड़ने वाले इम्यून सिस्टम को दुरुस्त रखने का काम करता है। यह व्हाइट ब्लड सेल और इम्यूनिटी को बढ़ाता है। इसका प्रयोग कमजोरी, पेट के रोग, सीने में जकड़न और सर्दी-खांसी दूर करने में किया जाता है। यह भूख बढ़ाने का काम करता है। हृदय रोगों में भी यह राहत पहुंचाता है। गिलोय के तने को घर में जूस बनाकर आसानी से उपयोग कर सकते है। आजकल बाज़ार में गिलोय सत्व, गिलोय चूर्ण और गिलोय जूस उपलब्ध है।
ऐसे बनाएं: इसका काढ़ा बनाने के लिए सबसे पहले 2 इंच अदरक, 4 तुलसी के पत्ते, गिलोय के 2 तने अथवा 4 पत्ते, काली मिर्च 2, लौंग, एक छोटा टुकड़ा दालचीनी का 2 कप पानी में डालकर उबालें। जब इसका पानी आधा हो जाए तो इसे छानें और गुनगुना पिएं।
फायदे: मुलेठी की जड़ कैल्शियम, एंटीऑक्सिडेंट, एंटीबायोटिक और प्रोटीन भरपूर होती है। इसकी जड़ सांस की नली को स्वस्थ रखती है। मुलेठी को चबाकर खाने से गले की खराश दूर होती है।
ऐसे बनाएं: इसका काढ़ा बनाने के लिए एक गिलास पानी में 5 काली मिर्च को कूटकर, एक टुकड़ा मुलेठी का डालें, 5 पत्तियां तुलसी की और एक छोटा टुकड़ा अदरक का डालकर धीमी आंच पर उबलने दें। जब पानी उबलकर आधा रह जाए तब इसमें चौथाई चम्मच हल्दी पाउडर डाल दें और दो-तीन उबाल आने दें। इसके बाद एक कप में छान लें और शहद मिलाकर पिएं। मुलेठी के इस काढ़े को सुबह पीने से ज्यादा फायदा होता है।
फायदे: कालमेघ का वैज्ञानिक नाम ‘एन्ड्रोग्रैफिस पेनीकुलेटा’ है। कालमेघ एक छोटा सा पौधा होता है। यह एंटीवायरल, एंटीबैक्टीरियल, एन्टीकैंसर और एंटीइन्फ्लेमेटरी होता है। यह डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फायदेमंद है। इसके काढ़े और पत्तियों का इस्तेमाल हैजा, अस्थमा, बुखार, हाई ब्लड प्रेशर, खांसी, गले में छाले, अतिसार, पाइल्स और भगन्दर के इलाज में होता है।
ऐसे बनाएं: इस पौधे के सभी हिस्से बेहद कड़वे होते हैं, इसलिए इसे कड़वाहट का राजा भी कहा जाता है। काढ़ा बनाने के लिए पूरे पौधे को एक लीटर पानी में डालकर उबालें। जब पानी आधा रह जाए तो इसे छानकर ठंडा करके एक चम्मच शहद के साथ लिया जा सकता है। इसे कैप्सूल, वटी (गोली), पाउडर के रूप में भी लिया जा सकता है। यह बाजार में उपलब्ध है।
फायदे: आजकल घरों में मसाला काढ़े के इस्तेमाल अधिक हो रहा है। यह काढ़ा गले के खराश, जुकाम में राहत देता है। मसाला काढ़ा घर की रसोई में मौजूद मसालों से बनाया जाता है।
ऐसे बनाएं: इसे बनाने के लिए काली मिर्च, लौंग, छोटी इलायची और दालचीनी मिला कर पाउडर बना लें। इसके बाद एक पैन में 1 से 2 कप पानी गर्म लें और फिर इन सभी मसालों को उसमें डाल दें। एक मिनट तक इसे उबालें। फिर पानी को छान लें और हल्का ठंडा होने के लिए छोड़ दें। तुलसी की 4 पत्तियां और स्वादनुसार शहद मिलाकर पी सकते हैं।यदि आप अच्छा परिणाम पाना चाहते हैं, तो इसके इस्तेमाल से पहले चिकित्सक की सलाह लेना ना भूलें।


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