खट्टी डकार का आना आमतौर पर कोई बीमारी नहीं है इससे यह पता चलता है कि आपके पेट में हवा ज्यादा भर गई है। इसके अलावा यह समस्या ज्यादा खाने या फिर जल्दी-जल्दी खाने से भी होती है। बता दें कि डकारें अपच के कारण पैदा होती हैं और अपच धूम्रपान, तनाव, कोल्ड ड्रिंक, शराब के सेवन आदि से पैदा होता है। ऐसे में डकार के साथ पेट में जलन, उल्टी, पेट फूलने की समस्या, पेट में दर्द गले में जलन आदि की समस्याएं भी उत्पन्न हो जाती हैं। इसलिए इसका समय से इलाज करना जरूरी होता है। सबसे पहला सवाल ये है कि डकार किन कारणों से पैदा होती है? इसका सवाल आपको इस लेख में आगे दिया जा रहा है। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से भी ये भी बताएंगे कि डकार आने के लक्षण और इससे बचने के उपाय क्या है ?
क्यों आती हैं खट्टी डकारें
1- खानपान की गलत आदतें
जब लोगों को भूख ज्यादा लगती
है तो वे ज्यादा भोजन खा लेते हैं या फिर वो भोजन जल्दी-जल्दी खा लेते हैं, जिसके कारण
उन्हें डकारे आना शुरू हो जाती हैं। इसके अलावा जिनकी नाक बंद होती है तो वे मुंह के
माध्यम से सांस लेते हैं। यहीं कारण होता है
कि हवा पेट में भर जाती है और इसकी वजह से लोगों में भी खट्टी डकार की समस्या हो सकती
है। ऐसे लोगों को एसिड रिफ्लक्स यानि पेट के एसिड का भोजन नली में आ जाने के कारण भी
इस तरह की समस्याएं पैदा हो सकती है।
2- शराब और कैफीन के कारण
बता दें कि जो लोग शराब और
कैफीन का अधिक मात्रा में सेवन करते हैं तो इससे उनकी भोजन नली का निचला हिस्सा बहुत
ज्यादा प्रभावित होना शुरू हो जाता है, जिसके कारण एसिड रिफ्लक्स (पेट के एसिड का भोजन
नली में आ जाने के कारण) होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा कार्बोनेटेड पेय
पदार्थ के सेवन से भी ज्यादा डकारे आती हैं। कार्बोनेटेड पेय पदार्थ में शराब, कैफीन
के अलावा कोल्ड ड्रिंक, स्पार्कलिंग वाइन, बियर आदि भी आते हैं।
3- मोटापे के कारण
जिन लोगों का वजन अधिक होता
है या जिनके पेट का आकार बढ़ने लगता है उनके पेट पर ज्यादा जोर पड़ता है, जिसके कारण
एसिड भोजन नली में आने लगता है। जो लोग ज्यादा मात्रा में खा लेते हैं उन लोगों में
भी ये समस्या नजर आती हैं। बता दें कि मोटे लोगों की शिथिल जीवन शैली होती है और ऐसे
लोग ज्यादातर गंभीर समस्या जैसे डायबिटीज आदि से परेशान भी रहते हैं, जिसके कारण ये
शिकायतें बढ़ जाती हैं।
4- गर्भावस्था में खट्टी डकार
का आना
गर्भावस्था के दौरान खट्टी
डकार आना बेहद आम बात है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि गर्भाशय का आकार बढ़ने लगता है
इस दौरान हार्मोन के भोजन नली के निचले हिस्से पर प्रभाव पड़ता है, जिससे गर्भवती महिलाएं
हमेशा पीड़ित रहती हैं। प्रेग्नेंसी में खून की कमी भी देखने को मिलती है। एनीमिया
के कारण सांस फूलने और अत्यधिक थकान होने के कारण भी वे मुंह से लेती हैं, जिससे मुंह
से सांस लेने के कारण हवा पेट में भर जाती हैं और यह डकार जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती
है। चूंकि गर्भावस्था में महिलाओं को कुछ कुछ समय पर थोड़ा थोड़ा खाना होता है ऐसे
में ये समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
5- पाचन संबंधी समस्या
अगर इसके मुख्य कारणों की बात
की जाए तो जिन लोगों को पाचन संबंधित समस्या रहती है उन लोगों को खट्टी डकार आने की
संभावना बढ़ जाती है। बता दें कि इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के कारण एसिड रिफ्लक्स (पेट
के एसिड का भोजन नली में आ जाने के कारण) हो जाता है।
6- बैक्टीरिया के मुंह में
आ जाने से
गैस तब बनती है जब बैक्टीरिया
पाचन क्षेत्र में खाना पचा रहे होते हैं। इसके कारण भी बदबूदार डकारे आने लगती हैं
और पेट फूलने की समस्या भी नजर आती हैं। बता दे जब हम प्रोटीन वाले आहार और शराब की
मात्रा अधिक कर लेते हैं तब भी तरह की समस्या नजर आती हैं।
खट्टी डकार के लक्षण
1 - पेट में दर्द होना
2 - पेट में गुड़गुड़ाहट महसूस
करना
3 - उल्टी टा मतली आना
4 - पेट फूलना
5 - पेट में गैस बन जाना
6 - अल्सर हो जाना (ऐसा तब
होता है जब एसिड पेट की ऊतकों को नष्ट कर देता है और घाव का रूप ले लेता है।
7 - पाचन क्रिया का धीमी हो
जाना
8 - कब्ज हो जाने पर फाइबर
की कमी के कारण पाचन क्रिया धीरे होती है, जिससे कब्ज की समस्या पैदा होती है।
खट्टी डकार से बचाव
अगर आप खट्टी डकार से परेशान
हैं तो इन सब चीजों से बचाव बेहद जरूरी है-
1 - च्युइंग गम का सेवन कम
करने से बचें।
2 - धूम्रपान से बचें।
3 - गलत खाने की आदत से बचें।
4 - सोने से पहले तुरंत खाना
ना खाएं
5 - शराब के अलावा कॉल ड्रिंक,
सोडा आदि कार्बोनेटेड पेय पदार्थों से बचें।
इन बातों का रखें ख्याल
1 - हर वक्त एक्टिव रहे- हर
वक्त सक्रिय रहने से आपके पेट में होने वाली गैस या दर्द आपसे दूर रहेगा।
2 - अधिक मात्रा में पानी पिएं-
अधिक मात्रा में पानी पीने से पाचन क्रिया अच्छी रहती है।
3 - खाना खाने के 2 घंटे बाद
तक ना लेटे- खाना खाने के कम से कम 2 धंटे बाद सोने के लिए जाएं।
4 - ज्यादा नमक या तेल वाले
खाने से बचें - अपनी डाइट में मिर्च मसालों के साथ नमक की मात्रा को सीमित रखें।
खट्टी डकारों को जोखिम कब बढ़
जाता है?
1 - भूखें रहने से
2 - तनाव में रहने से
3 - व्यायाम न करने से
4 - मुंह के जरिये पेट में
हवा जानें से
5 - तला-भुना खाने से
6 - अत्यधिक कॉफी पीने से
7 - जल्दी-जल्दी खाना खाने
से
8 - खाना खाने के बाद तुरंत लेटने से
9 - पेट भरे होने के बाद भी
खाना खाने से
नोट - जब किसी व्यक्ति को खट्टी
डकार आने की गंभीर समस्या हो जाती है तो वह भोजन की नली में जलन पैदा कर देता है। बता
दें कि इस अवस्था को ऐसोफैजाइटिस कहते हैं। इसके अलावा भोजन नली से खून आना शुरू हो
जाता है। गले और आवाज में परेशानी महसूस होती है। दांत सड़कर टूटने लगते हैं। सांस
लेने में तकलीफ महसूस होती है
यदि आप अच्छा परिणाम
पाना चाहते हैं, तो इसके इस्तेमाल से पहले चिकित्सक की सलाह लेना ना भूलें

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