आयुर्वेद के अनुसार हमारे हाथों में प्राण ऊर्जा होती है। जीवन के लिए आवश्यक सभी तत्व हमारे हाथों में पाए जाते है। इसलिए हमारे *हाथों का अंगूठा* अग्नि का प्रतीक है। *तर्जनी उंगली* हवा की प्रतीक है। *मध्यमा उंगली* आकाश की प्रतीक है। *अनामिका उंगली*पृथ्वी की प्रतीक है और *सबसे छोटी उंगली*जल की प्रतीक है। इनमे से किसी भी एक तत्व का असंतुलन बीमारी का कारण बन सकता है।



जब हम हाथ से खाना खाते हैं तो हम उंगलियों और अंगूठे को मिलाकर खाना खाते हैं और इससे जो हस्त मुद्रा बनती है। उसमें शरीर को निरोग रखने की क्षमता होती है। इसलिए जब हम खाना खाते हैं तो इन सारे तत्वों को एक जुट करते हैं जिससे भोजन ज्यादा ऊर्जादायक बन जाता है और यह स्वास्थ्यप्रद बनकर हमारे प्राणाधार की एनर्जी को संतुलित रखता है।

 पाचन क्रिया में सुधार होता है

 टच हमारे शरीर का सबसे मजबूत अक्सर इस्तेमाल होने वाला अनुभव है। जब हम हाथों से खाना खाते हैं तो हमारा दिमाग हमारे पेट को यह संकेत देता है कि हम खाना खाने वाले हैं। इससे हमारा पेट इस भोजन को पचाने के लिए तैयार हो जाता है, और पाचन तंत्र से खाना पचाने वाले रासायन स्त्रावित होने लगते हैं। जिससे पाचन क्रिया सुधरती है।

 तापमान का ख्याल रहता है

 आपके हाथ अच्छे तापमान संवेदक का काम भी करते हैं। जब आप भोजन को छूते हैं तो आपको अंदाजा लग जाता है कि यह कितना गर्म है और आप इसे अपने शरीर की आवश्यकता के अनुसार तापमान पर ही ग्रहण करते हैं और यही शरीर के लिए फायदेमंद भी होता है

एकाग्रता बढ़ाता है

हाथ से खाना खाने में आपको खाने पर ध्यान देना पड़ता है। इसमें आपको खाने को देखना पड़ता है और जो आपके मुह में जा रहा है उस पर ध्यान केंद्रित करना पड़ता है। इसलिए यह मशीन कि भांति चम्मच और कांटे से खाना खाने से ज्यादा स्वास्थयप्रद है।

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